दुर्ग में शराब की किल्लत या खेल कुछ और…? दुकानें सूनी, मगर गलियों में भरपूर सप्लाई!

दुर्ग// जिले में इन दिनों एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर देशी और विदेशी शराब की अधिकृत दुकानों में शराब की भारी कमी बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर शहर के चौक-चौराहों से लेकर गांव-गांव तक अवैध रूप से शराब की खुलेआम उपलब्धता कई सवाल खड़े कर रही है।
शराब प्रेमियों पर दोहरी मार…?
शराब की दुकानों में स्टॉक न होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को मजबूरीवश अवैध विक्रेताओं का सहारा लेना पड़ रहा है। यहां उन्हें शराब की कीमत दोगुनी या उससे भी अधिक दर पर चुकानी पड़ रही है। इससे साफ है कि आम लोगों की जेब पर सीधा अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
किल्लत दुकानों में, भरमार अवैध ठिकानों पर
सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जब अधिकृत दुकानों में शराब उपलब्ध नहीं है, तो आखिर अवैध विक्रेताओं के पास इतनी बड़ी मात्रा में शराब पहुंच कैसे रही है..? शहर के प्रमुख स्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम हो रही इस बिक्री से संदेह गहराता जा रहा है।
आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल..?
इस पूरे मामले में आबकारी विभाग की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। जानकारों का मानना है कि यदि दुकानों के सीसीटीवी फुटेज, आवक पंजी और स्टॉक रजिस्टर की गहन जांच की जाए, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि कहीं सिस्टम के भीतर से ही गड़बड़ी तो नहीं हो रही।
सूत्रों के दावे:– जानकारी के बावजूद कार्रवाई नहीं
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव चिंता का विषय है। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रशासन की मंशा पर सवाल नहीं उठाए जा रहे, बल्कि विभागीय स्तर पर कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पारदर्शिता और सख्ती की जरूरत…?
जनता की अपेक्षा है कि इस मामले में पारदर्शिता लाई जाए और यदि कहीं अनियमितता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि अधिकृत दुकानों में पर्याप्त मात्रा में शराब उपलब्ध हो, ताकि अवैध कारोबार पर स्वतः अंकुश लग सके।
निष्कर्ष:–
दुर्ग में मौजूदा स्थिति केवल आपूर्ति की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा मुद्दा बनती जा रही है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस पर किस तरह संज्ञान लेकर स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठाता है।
टीप:– रेट लिस्ट गायब, उपभोक्ताओं की जेब पर असर!
दुर्ग जिले की देशी और विदेशी शराब दुकानों में जहां पहले से ही आपूर्ति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं अब एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। अधिकांश दुकानों में वर्तमान दर सूची (रेट लिस्ट) सूचना बोर्ड पर प्रदर्शित नहीं की गई है, जिससे उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
बिना रेट लिस्ट के बिक्री, पारदर्शिता पर सवाल
शराब दुकानों में रेट लिस्ट का प्रदर्शित न होना सीधे तौर पर पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। उपभोक्ताओं को यह तक स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि वे जो कीमत चुका रहे हैं, वह निर्धारित दर के अनुसार है या नहीं।
अवैध वसूली की आशंका बढ़ी…?
विशेषज्ञों का मानना है कि रेट लिस्ट के अभाव में मनमाने दाम वसूले जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे पहले से परेशान उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका और बढ़ जाती है।
प्रशासन से स्पष्ट निर्देश की मांग…?
जनता की ओर से मांग उठ रही है कि सभी शराब दुकानों पर तत्काल प्रभाव से नई रेट लिस्ट को अनिवार्य रूप से सूचना बोर्ड पर प्रदर्शित कराया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगाई जा सके।
निष्कर्ष:–
छोटी दिखने वाली यह लापरवाही बड़े स्तर पर उपभोक्ता अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग इस पर त्वरित संज्ञान लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करे।



