पोस्टर हटाने पर सियासत गरम, निकिता मिलिंद के बयान पर उठे सवाल-“जो बोओगे, वही काटोगे”

दुर्ग// छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के जन्मदिन पर लगाए गए शुभकामना बैनरों को हटाए जाने को लेकर दुर्ग शहर जिला कांग्रेस की जिला महामंत्री निकिता मिलिंद ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई का कारण स्पष्ट करने और राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार की मांग की है।
हालांकि, निकिता मिलिंद के बयान के बाद अब कांग्रेस के ही पुराने दौर की पोस्टर राजनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जब सत्ता में कांग्रेस थी, तब दुर्ग शहर में भूपेश बघेल के पोस्टर हटाने और बदलने को लेकर कांग्रेस के भीतर ही विवाद सामने आया था। उस समय पोस्टर लगाने वाली एजेंसी पर कार्रवाई और नोटिस को लेकर भी मामला काफी चर्चित रहा था।
यही वजह है कि अब विरोधियों का सवाल है—क्या सत्ता बदलने के साथ पोस्टर हटाने के नियम और लोकतांत्रिक अधिकारों की परिभाषा भी बदल जाती है..
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सियासत में शायद यही सबसे बड़ा आईना होता है कि आज जिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई जा रही है, कल उसी तरह की कार्रवाई के समय आपकी भूमिका क्या थी। यदि उस समय नियम-कायदे सर्वोपरि थे, तो आज भी वही नियम लागू होने चाहिए; और यदि आज राजनीतिक अभिव्यक्ति के अधिकार की बात हो रही है, तो यही लोकतांत्रिक भावना सत्ता में रहते हुए भी दिखाई देनी चाहिए।
हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी भी राजनीतिक दल के पोस्टर-बैनर को हटाने की कार्रवाई निर्धारित नियमों और समान मापदंडों के आधार पर ही हो। लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन राजनीतिक मर्यादा और निष्पक्ष प्रशासन की कसौटी स्थायी रहनी चाहिए।
दुर्ग की पोस्टर राजनीति पर अब एक कहावत बिल्कुल सटीक बैठती दिखाई दे रही है—“जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे।” आज सत्ता पक्ष यदि पोस्टर हटाने की कार्रवाई कर रहा है तो कल परिस्थितियां बदल सकती हैं और विपक्ष को भी वही अनुभव हो सकता है।
सबसे अहम बात यह है कि किसी नेता का पोस्टर हटने से उसका राजनीतिक अस्तित्व समाप्त नहीं होता। नेता की राजनीतिक स्वीकार्यता पोस्टर की संख्या से नहीं, बल्कि जनता के बीच उसके काम, विचार और जनसमर्थन से तय होती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या दुर्ग की राजनीति पोस्टर हटाने और लगाने की राजनीति से आगे बढ़कर उस दोहरे मापदंड पर भी चर्चा करेगी, जिसमें सत्ता में रहते हुए एक नियम और विपक्ष में रहते हुए दूसरा नजरिया दिखाई देता है?
फिलहाल, निकिता मिलिंद का बयान शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और सियासी गलियारों में लोग पुराने घटनाक्रमों को याद करते हुए इसे “राजनीति का आईना” बता रहे हैं।



