अवैध शोरूम पर RTO की ‘जांच’ कब खत्म होगी..? महीनों से शिकायत, अब तक कार्रवाई नदारद !
अवैध शोरूम पर कार्रवाई कब..? RTO के जांच करेंगे वाले जवाब से उठे सवाल, विभागीय संरक्षण की चर्चा तेज..

दुर्ग// प्रदेश में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन के दावों के बीच दुर्ग क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में कथित रूप से संचालित अवैध वाहन शोरूम की जानकारी एवं शिकायतें क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी मृत्युंजय पटेल तक पहुंचने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है।
मृत्युंजय पटेल के दुर्ग में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के रूप में पदभार संभालने के बाद विभाग में कथित ठेकेदारी और दलाली प्रथा पर लगाम लगाने तथा नियम विरुद्ध संचालित वाहन कारोबार पर कार्रवाई की उम्मीद जगी थी। शुरुआती दौर में विभाग की सक्रियता को लेकर चर्चाएं भी हुईं, लेकिन शिकायतों को कई महीने बीत जाने के बाद भी कार्रवाई को लेकर सवाल बरकरार हैं।
‘जांच करेंगे… समय निकालकर कार्रवाई करेंगे’—कब आएगा नतीजा..?
सूत्रों और शिकायतकर्ताओं के अनुसार कथित अवैध शोरूमों की जानकारी विभाग को दी जा चुकी है। इस संबंध में जब क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से चर्चा की गई तो कार्रवाई और जांच किए जाने की बात कही गई। सवाल यह है कि यदि मामला विभाग के संज्ञान में है तो कार्रवाई के लिए आखिर कितना और समय लगेगा..?
एक ओर आम वाहन उपभोक्ताओं से लाइसेंस, आरसी ट्रांसफर, फिटनेस और अन्य नियमों के पालन को लेकर सख्ती की जाती है, वहीं दूसरी ओर यदि बिना आवश्यक अनुमति के वाहन बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठान संचालित होने के आरोप सही हैं, तो उन पर कार्रवाई में देरी क्यों..?
अधिकृत विक्रेता भी सवालों के घेरे में….
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यदि किसी निजी अथवा अनधिकृत प्रतिष्ठान को नए वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, तो केवल कथित अवैध शोरूम संचालक ही नहीं, बल्कि वाहन उपलब्ध कराने वाले अधिकृत विक्रेता की भूमिका की भी जांच जरूरी है।
सवाल यह है कि क्या अधिकृत डीलर अपने अधिकृत शोरूम या गोदाम से बिना आवश्यक विभागीय अनुमति के ऐसे निजी संचालकों को वाहन उपलब्ध करा रहे हैं..? यदि ऐसा हो रहा है तो संबंधित अधिकृत विक्रेताओं के विरुद्ध विभाग ने क्या कार्रवाई की..?
जांच टीम गई तो अवैध शोरूम क्यों नहीं मिला…?
इस पूरे मामले में एक और सवाल चर्चा में है। बताया जाता है कि विभागीय टीम द्वारा कथित रूप से जांच के लिए क्षेत्र का दौरा किया गया, लेकिन अधिकारियों के अनुसार उन्हें कोई अवैध शोरूम नहीं मिला।
ऐसे में सवाल उठता है कि शिकायतों में जिन स्थानों और गतिविधियों की जानकारी विभाग को दी गई थी, क्या उनकी वास्तविक और स्वतंत्र तरीके से जांच हुई..? यदि हुई, तो जांच की रिपोर्ट क्या है..? और यदि कथित अवैध संचालन वास्तव में नहीं मिला, तो शिकायतकर्ताओं को इसकी आधिकारिक जानकारी क्यों नहीं दी गई..?
‘जयचंद’ कौन..? या महज खानापूर्ति..?
जांच टीम के पहुंचने से पहले ही यदि संबंधित प्रतिष्ठानों को कार्रवाई की भनक लग जाती है, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि सूचना लीक कैसे हुई। हालांकि इस संबंध में किसी अधिकारी या कर्मचारी पर कोई निष्कर्ष निकालने से पहले विभागीय जांच आवश्यक है।
क्या विभाग के भीतर से कोई सूचना बाहर पहुंच रही है..?
क्या जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है..?
या फिर शिकायतों की वास्तविकता की ही जांच नहीं हो रही..?
इन सवालों का जवाब विभागीय स्तर पर पारदर्शी जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
त्योहारी सीजन में बढ़ सकती है उपभोक्ताओं की परेशानी
त्योहारी सीजन में वाहनों की बिक्री बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में यदि बिना आवश्यक अनुमति के वाहन बिक्री करने वाले प्रतिष्ठान सक्रिय हैं, तो ग्राहकों से वाहन की कीमत के अलावा एक्सेसरीज, फाइनेंस और अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूले जाने की शिकायतों की भी जांच जरूरी है।
विशेषकर निजी फाइनेंस के नाम पर ब्याज और अन्य शुल्क से संबंधित शिकायतों पर भी संबंधित विभागों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब RTO से सीधे सवाल…
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी मृत्युंजय पटेल के सामने अब कई सवाल हैं—
• कथित अवैध शोरूमों की शिकायत मिलने के बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई…?
• कितने प्रतिष्ठानों की जांच की गई और जांच का परिणाम क्या रहा..?
• क्या अधिकृत वाहन विक्रेताओं द्वारा बिना आवश्यक अनुमति के वाहनों की आपूर्ति की जांच हुई..?
• यदि अवैध शोरूम नहीं मिले तो शिकायतों की सत्यता की जांच किस आधार पर की गई…?
• क्या विभागीय जांच के दौरान किसी प्रकार की सूचना लीक होने की आशंका की जांच की गई..?
• त्योहारी सीजन से पहले विभाग ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाएगा..?
दुर्ग RTO की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे इन सवालों का जवाब अब केवल “जांच करेंगे”, “समय निकालकर कार्रवाई करेंगे” जैसे आश्वासनों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई और सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की गई जांच रिपोर्ट से अपेक्षित है।
प्रदेश सरकार द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दुर्ग क्षेत्रीय परिवहन विभाग इन शिकायतों पर कब तक ठोस कार्रवाई करता है और कथित अवैध वाहन कारोबार की पूरी श्रृंखला की जांच किस स्तर तक पहुंचती है।
फिलहाल सवाल एक ही है—कार्रवाई कब…?



