स्मार्ट पुलिसिंग पर सवाल! महमरा में रात 3 बजे चाकूबाजी-लूट, पेट्रोलिंग रस्मड़ा में!
क्राइम ब्रांच भी आरोपियों से दूर, आखिर कब होगी गिरफ्तारी..?

दुर्ग// अंजोरा चौकी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम महमरा में देर रात करीब 3 बजे दो युवकों के साथ कथित चाकूबाजी और लूट की घटना सामने आने के बाद पुलिस की पेट्रोलिंग व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। घटना में कमल निषाद और लोकेश निषाद के घायल होने की बात सामने आई है। पीड़ितों के मुताबिक, आरोपियों ने हमला करने के बाद मोबाइल, करीब 1,000 से 1,200 रुपये नकद और बाइक की चाबी ले जाने का आरोप है,
घटना महमरा में… पेट्रोलिंग टीम रस्मड़ा में..
घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल पुलिस पेट्रोलिंग के तरीके पर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि घटना के समय पेट्रोलिंग टीम रस्मड़ा क्षेत्र में मौजूद थी, जबकि वारदात महमरा में हुई।
ऐसे में सवाल यह है कि संवेदनशील और आसपास के इलाकों में पुलिस की लगातार मूवमेंट और निगरानी किस तरह सुनिश्चित की जा रही थी..?
क्या पेट्रोलिंग का मतलब सिर्फ एक स्थान पर मौजूद रहना है, या पूरे क्षेत्र में लगातार गश्त कर अपराध की संभावनाओं पर नजर रखना..?
वारदात के बाद क्राइम ब्रांच मैदान में…
घटना के बाद अंजोरा चौकी पुलिस ने अज्ञात आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। वहीं क्राइम ब्रांच की टीम भी आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी है। लेकिन सवाल यह है कि घटना के बाद जांच तेज होने के बावजूद आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं..?
पीड़ितों के अनुसार, बाइक सवार युवकों से विवाद के बाद आरोपी दोबारा लौटे और हमला किया। इसके बाद कथित तौर पर सामान लेकर फरार हो गए।
अब सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं… पेट्रोलिंग का भी!
अगर पेट्रोलिंग टीम एक क्षेत्र में मौजूद रहेगी, तो उससे लगे दूसरे इलाकों में अचानक होने वाली वारदातों पर तत्काल पुलिस की पहुंच कैसे सुनिश्चित होगी..?
रात के समय संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी और गश्त का दायरा कितना प्रभावी है—यह सवाल अब चर्चा में है।
दुर्ग पुलिस के सामने दोहरी चुनौती…
एक तरफ पुलिस के सामने अज्ञात आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की चुनौती है, तो दूसरी तरफ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पेट्रोलिंग व्यवस्था की समीक्षा का सवाल भी सामने है।
महमरा की रात की वारदात ने एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है—
पुलिस आरोपियों तक कब पहुंचेगी और अपराधियों से पहले पुलिस की पेट्रोलिंग संवेदनशील इलाकों तक कब पहुंचेगी..?



