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दुर्ग RTO की कार्यप्रणाली पर सवाल: कथित अवैध वाहन बिक्री केंद्रों पर कार्रवाई कब…?

शिकायतों के बावजूद जांच और कार्रवाई नहीं होने का आरोप, अधिकृत शोरूम संचालकों में नाराजगी: RTO अधिकारी मृत्युंजय प्रसाद पटेल की भूमिका पर उठे सवाल...?

दुर्ग// प्रदेश सरकार जहां सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेह प्रशासन का दावा कर रही है, वहीं दुर्ग जिले में परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि शहर से लगे ग्रामीण और अन्य क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर अधिकृत शोरूम के बजाय कथित तौर पर नए वाहनों की बिक्री की जा रही है। शिकायतें विभाग तक पहुंचने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अब सवाल सीधे दुर्ग RTO की कार्यप्रणाली पर उठने लगे हैं।

शोरूम कहीं और, नए वाहनों की बिक्री कहीं और..?

वाहन कारोबार में डीलर परिसर, बिक्री केंद्र, वाहन भंडारण और संबंधित दस्तावेजों की वैधता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी अधिकृत शोरूम से अलग परिसर में नए वाहनों की बिक्री की जा रही है, तो उस स्थान की अनुमति, डीलरशिप संबंधी दस्तावेज और बिक्री व्यवस्था की जांच होना जरूरी है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि दुर्ग जिले में कुछ वाहन विक्रेताओं द्वारा सर्विस सेंटर अथवा अन्य परिसरों से नए वाहनों की बिक्री किए जाने की जानकारी सामने आई है। यदि जांच में यह बात सही पाई जाती है तो परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है।

शिकायत पहुंची तो कार्रवाई क्यों नहीं..?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को कथित अनियमितताओं की जानकारी दी गई है, तो अब तक संबंधित परिसरों का व्यापक निरीक्षण क्यों नहीं हुआ..?

दुर्ग RTO अधिकारी मृत्युंजय प्रसाद पटेल की कार्यप्रणाली को लेकर भी इसी वजह से सवाल उठ रहे हैं। शिकायतों के बावजूद यदि कथित बिक्री केंद्र सक्रिय हैं, तो विभाग को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि—

– कितने परिसरों का निरीक्षण किया गया..?

– कितने वाहन विक्रेताओं के दस्तावेजों की जांच हुई..?

– कितने बिक्री केंद्र अधिकृत पाए गए..?

– नियमों का उल्लंघन मिलने पर कितनी कार्रवाई की गई..?

– यदि कोई अनियमितता नहीं मिली तो शिकायतों का निपटारा किस आधार पर किया गया..?

नियम मानने वालों के लिए अलग और कथित अनधिकृत केंद्रों के लिए अलग व्यवस्था..?

अधिकृत वाहन विक्रेता शोरूम, गोडाउन और बिक्री व्यवस्था से जुड़ी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हैं। इसके लिए उन्हें विभिन्न विभागीय औपचारिकताओं और नियमों का पालन करना पड़ता है। ऐसे में यदि कोई विक्रेता निर्धारित अनुमति के बाहर किसी अन्य परिसर से नए वाहनों का कारोबार करता है और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती, तो नियमों का पालन करने वाले अधिकृत कारोबारियों के बीच असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा होने की आशंका है।

यही वजह है कि अब मांग उठ रही है कि दुर्ग जिले में वाहन बिक्री केंद्रों और संबंधित परिसरों का निष्पक्ष एवं व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जाए।

 

RTO विभाग की चुप्पी पर बढ़ता सवाल..?

इन मामले में विभाग की ओर से स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आने से चर्चाओं को और बल मिल रहा है। यदि शिकायतें निराधार हैं तो परिवहन विभाग को दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित विक्रेताओं के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

अब परिवहन मंत्री से कार्रवाई की उम्मीद..?

मामला अब परिवहन मंत्री केदार कश्यप के स्तर तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि क्या मंत्री स्तर से दुर्ग जिले में संचालित कथित अनधिकृत वाहन बिक्री केंद्रों की जांच के निर्देश दिए जाएंगे..?

क्या विभाग यह पता लगाएगा कि किस परिसर को किस उद्देश्य के लिए अनुमति मिली है और वहां वास्तव में किस प्रकार का कारोबार संचालित हो रहा है..?

 

जांच ही बताएगी—आरोप में कितना दम..?

फिलहाल आरोप गंभीर हैं, लेकिन इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण दस्तावेजी जांच और विभागीय कार्रवाई से ही होगा। इसलिए जरूरी है कि परिवहन विभाग मामले को लेकर पारदर्शी जांच करे और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करे।

यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि आरोप निराधार हैं तो RTO को आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

अब निगाहें दुर्ग RTO पर हैं—क्या कथित अवैध वाहन बिक्री केंद्रों पर चलेगा कार्रवाई का डंडा, या शिकायतों की फाइलें सरकारी दफ्तरों में ही धूल खाती रहेंगी..?

Dhanendra Namdev

Editor, IND24tv.com

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