जंजगीरी की सड़क या हादसे का न्योता? करोड़ों खर्च के बाद भी गड्ढों में सफर, PWD की कार्यप्रणाली पर सवाल…
जंजगीरी की बदहाल सड़क पर बड़ा सवाल—क्या PWD किसी हादसे का इंतजार कर रहा है..?

दुर्ग ग्रामीण// ग्राम पंचायत जंजगीरी में करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क की बदहाल स्थिति अब ग्रामीणों और राहगीरों के लिए मुसीबत बन चुकी है। सड़क जगह-जगह उखड़ चुकी है, गड्ढों ने राह मुश्किल कर दी है और आवागमन के दौरान हर वक्त हादसे का खतरा बना हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या हादसा होने के बाद ही सड़क की सुध ली जाएगी..?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति की जानकारी PWD विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक कई बार पहुंचाई जा चुकी है। इसके बावजूद स्थायी सुधार की दिशा में ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, विभाग की ओर से गड्ढों में डस्ट और मलमा डालकर उन्हें भरने की औपचारिकता जरूर की गई, लेकिन कुछ ही समय में सड़क फिर उसी बदहाल स्थिति में पहुंच गई।
गड्ढे भरने के नाम पर सिर्फ दिखावा…?
राहगीरों का आरोप है कि सड़क की वास्तविक मरम्मत करने के बजाय गड्ढों में डस्ट-मलमा डालकर महज खानापूर्ति की जा रही है। इससे न तो सड़क की मजबूती लौट रही है और न ही दुर्घटना का खतरा कम हो रहा है। बारिश के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
सवाल यह है कि जब विभाग को सड़क की बदहाली की जानकारी है, तो फिर स्थायी मरम्मत क्यों नहीं की जा रही है..?
करोड़ों की सड़क, फिर भी राहगीर परेशान….?
जिस सड़क के निर्माण पर करीब 2.75 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है, उसकी मौजूदा स्थिति सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ओर निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सड़क के खराब होने के बाद भी राहगीरों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि गांव के लोगों की रोजमर्रा की जरूरत है। इसी रास्ते से स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, मरीज, किसान और दोपहिया वाहन चालक गुजरते हैं। ऐसे में सड़क की बदहाली किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
हादसा होने के बाद जागेगा विभाग…?
अब ग्रामीणों का सीधा सवाल शासन और PWD विभाग से है—क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही अधिकारियों की नींद खुलेगी…?
यदि विभाग को सड़क की खराब स्थिति की जानकारी पहले से है, तो फिर तत्काल तकनीकी जांच कराकर स्थायी सुधार क्यों नहीं कराया जा रहा? सिर्फ गड्ढों में डस्ट-मलमा डालकर जिम्मेदारी पूरी कर देना आखिर कब तक चलेगा..?
जनता को ऐसी सड़क नहीं चाहिए जिसका सुधार सिर्फ कागजों या दिखावे तक सीमित रहे। ग्रामीणों की मांग है कि सड़क की गुणवत्ता की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण में यदि खामी पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय की जाए और सड़क की स्थायी मरम्मत तत्काल कराई जाए।
अब देखना यह है कि PWD और जिला प्रशासन इस बदहाल सड़क को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर किसी दुर्घटना के बाद ही सड़क की तस्वीर बदलने का इंतजार किया जाएगा।



