2.75 करोड़ की नई सड़क बनी ‘भ्रष्टाचार की मिसाल’, तीन महीने में उखड़ी—PWD इंजीनियर और ठेकेदार पर उठे सवाल…?

दुर्ग// ग्राम पंचायत जंजगीरी में लोक निर्माण विभाग (PWD) का एक और काम अब सवालों के घेरे में है—और इस बार मामला सीधे जनता की जेब और सिस्टम की साख से जुड़ा है। वर्ष 2022-23 में निकले टेंडर को रायपुर की शिवानी कांट्रेक्टर को सौंपा गया, लेकिन वर्क ऑर्डर मिलने के बाद भी ठेकेदार ने काम शुरू करने में महीनों की देरी की। एक साल का अतिरिक्त समय लेने के बावजूद काम की रफ्तार और गुणवत्ता दोनों ही संदिग्ध बनी रही।
टेंडर पास, काम लापता—क्या सिर्फ कागजों में हुआ निर्माण..?
तय समय सीमा में काम शुरू न होने पर PWD ने ठेकेदार को (फाइन) नोटिस तो थमा दिया, लेकिन उसके बाद भी जमीनी हकीकत नहीं बदली। सवाल यह उठता है कि आखिर विभागीय निगरानी किस स्तर पर हो रही थी..? क्या केवल कागजी कार्रवाई से ही जिम्मेदारी पूरी मान ली गई..?
सब इंजीनियर का कबूलनामा:—ठेकेदार की खुली लापरवाही…
सब इंजीनियर कंचन सिंह ने खुद स्वीकार किया कि निर्माण कार्य में ठेकेदार की लापरवाही साफ नजर आई। करीब 75 मीटर पुल और 180 मीटर डामर सड़क का निर्माण हुआ, लेकिन गुणवत्ता इतनी घटिया रही कि पहली ही परीक्षा में फेल हो गई।
पहली बारिश में सड़क ‘गायब’ 2.75 करोड़ पानी में बह गए..?
अप्रैल 2026 में बनी सड़क जुलाई की पहली बारिश भी नहीं झेल सकी। डामर उखड़कर गड्ढों में तब्दील हो गया और पूरी सड़क जर्जर हालत में पहुंच गई। करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क का तीन महीने में यह हाल—सीधे-सीधे इंजीनियरिंग क्वालिटी और ठेकेदारी सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा—‘ये लापरवाही नहीं, खुला भ्रष्टाचार है..?
स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इतनी जल्दी सड़क का उखड़ना महज लापरवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की बू देता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जिम्मेदार कौन—इंजीनियर, ठेकेदार या पूरा सिस्टम…?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2.75 करोड़ की लागत से बनी सड़क अगर तीन महीने में दम तोड़ दे, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी..? क्या सिर्फ ठेकेदार पर कार्रवाई होगी, या PWD के इंजीनियरों की भूमिका की भी जांच होगी..?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं—क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, या यह मामला भी ‘फाइलों’ में दबकर रह जाएगा…?



