PWD निर्माण पर बड़ा सवाल— ‘काम’ हुआ या सिर्फ खानापूर्ति..?
PWD के कामों पर सवाल—मरम्मत के नाम पर गिट्टी डाली, फिर उखड़ी; नवीन भवन में मुरम की जगह काली राख से फिलिंग का आरोप..?

दुर्ग// दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत जांजगीर में सड़क और पुलिया निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ महीने पहले लाखों रुपये की लागत से बनाई गई पुलिया और सड़क जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो गई। हालात ऐसे हैं कि जिस निर्माण को लंबे समय तक टिकना था, वह कुछ ही महीनों में मौसम की पहली परीक्षा में ही जवाब दे गया।
सड़क में बने गड्ढों की मरम्मत के नाम पर ठेकेदार द्वारा महज गिट्टी डालकर खानापूर्ति किए जाने की बात सामने आ रही है। लेकिन कुछ ही दिनों बाद गिट्टी भी उखड़ गई और सड़क दोबारा गड्ढों में तब्दील हो गई। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित है…?
मरम्मत या सिर्फ ‘गड्ढे भरने’ की औपचारिकता…?
स्थानीय स्तर पर सामने आई स्थिति विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। सड़क की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मरम्मत के नाम पर स्थायी समाधान के बजाय केवल तत्कालीन खानापूर्ति की गई। बारिश ने विभाग और ठेकेदार के काम की गुणवत्ता की पोल खोल दी।
PWD विभाग में नया कार्यालय भवन पर भी सवालों के घेरे में निर्माण…
मामला यहीं खत्म नहीं होता। दुर्ग स्थित PWD के नवीन भवन निर्माण कार्य में भी निर्माण सामग्री और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलिंग के दौरान मुरम की जगह काली राख जैसी सामग्री डाले जाने का मामला सामने आया है। यदि यह मामला सही है तो यह निर्माण की गुणवत्ता और मानकों की गंभीरता से जांच का विषय है।
विभागीय अधिकारी मौन…..?
इस पूरे मामले को लेकर PWD विभाग के अधिकारियों से दूरभाष के माध्यम से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। अधिकारियों से प्रत्यक्ष मुलाकात के लिए भी संपर्क किया गया, मगर मुलाकात नहीं हो पाई।
अब सवाल यह है कि जब सरकारी निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हों, तो जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से क्यों बच रहे हैं…? क्या विभागीय अधिकारियों ने निर्माण स्थल का नियमित निरीक्षण किया..? यदि किया, तो घटिया सड़क और पुलिया निर्माण उनकी नजर से कैसे बच गया..? और यदि मुरम के स्थान पर काली राख जैसी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, तो उसकी गुणवत्ता जांच किसने की…?
जनता के पैसों से निर्माण, जवाबदेही किसकी…?
सरकारी निर्माण कार्यों में खर्च होने वाला पैसा जनता की मेहनत की कमाई से आता है। ऐसे में कुछ महीनों में सड़क और पुलिया का खराब हो जाना केवल निर्माण की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी धन और विभागीय निगरानी की व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और यदि निर्माण में नियमों या गुणवत्ता मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए।
क्योंकि सवाल सिर्फ सड़क और पुलिया का नहीं है—सवाल यह है कि सरकारी काम की गुणवत्ता बारिश से तय होगी या विभाग की निगरानी से…?



