छत्तीसगढ़दुर्ग जिलादुर्ग शहर

दुर्ग नगर निगम: तालाबों व नदी,नालों की दुर्दशा, जलकुंभी सफाई मशीन को दे दी किराए पर..!

दुर्ग//  नगर पालिक निगम में इन दिनों सफाई व्यवस्था का जो हाल है, उसे देखकर यही कहा जा सकता है कि शहर बदल रहा है, पर शायद बेहतरी के लिए नहीं।” तालाबों की सफाई के लिए जलकुंभी लाखों की मशीन मंगाई गई, पर दुर्ग के तालाबों की किस्मत में सफाई नहीं, बल्कि यह जलकुंभी मशीन अब ‘किराए पर’ घूम रही है। जी हां, आपने सही पढ़ा। अपनी ही मशीन को किराए पर देकर दुर्ग निगम ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जो शायद इतिहास के पन्नों में “जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी” के रूप में दर्ज होगा।
शहर की जनता ने महापौर अलका बाघमार को पूर्ण बहुमत यह सोचकर दिया था कि अब दुर्ग के दिन बहुरेंगे, लेकिन इन चंद महीनों में ही स्पष्ट हो गया है कि जनता की उम्मीदें तैरना नहीं, बल्कि डूबना शुरू हो गई हैं। पिछले 25-30 सालों में दुर्ग निगम की व्यवस्था इतनी बदहाल कभी नहीं रही, जितनी इन चार महीनों में हो चुकी है।
विधायक गजेंद्र यादव के प्रयासों से स्वास्थ्य विभाग के लिए 12 करोड़ रुपये के संसाधन आए, लेकिन विडंबना देखिए कि विधायक और महापौर की आपसी गुटबाजी का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा लगता है कि शहर के विकास से ज्यादा महत्वपूर्ण कुर्सी की लड़ाई हो गई है। तालाबों की सफाई मशीन जलकुंभी को किराए पर देना, शायद इसी गुटबाजी का प्रत्यक्ष परिणाम है। दुर्ग गंदा रहे तो क्या हुआ, निगम की कमाई तो बढ़ रही है, यह नया नारा है जो इस शहरी सरकार ने अनजाने में ही दे दिया है।
सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी तस्वीरों और छोटी-छोटी रीलों के माध्यम से झूठी उपलब्धियों का बखान करने का चलन भी अब आम हो चुका है। जनता को अब अपनी ‘गलती’ का एहसास हो रहा है, लेकिन कहते हैं ना, अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत! अगले पांच साल तक दुर्ग की जनता को शायद अपनी आंखों के सामने इस बदहाली को देखते रहना होगा। महापौर की काबिलियत पर उठते सवाल और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता ने यह साफ कर दिया है कि यह ‘शहरी सरकार’ सिर्फ सोशल मीडिया पर ही सक्रिय है, जमीन पर नहीं।
क्या इस स्थिति में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अपनी इस “गुटबाजी से ग्रस्त” सरकार पर कोई लगाम लगाएगा, या दुर्ग की जनता को अगले पांच साल तक इसी तरह अपनी गलती पर पछताना पड़ेगा? सवाल अनुत्तरित हैं, और दुर्ग के तालाब अपनी बदहाली पर शायद आंसू बहा रहे हैं, उस मशीन को जाते हुए देखकर जो उनकी सफाई के लिए आई थी, पर अब दूसरों की सेवा में लगी है।

Dhanendra Namdev

Editor, IND24tv.com

Related Articles

Back to top button