विधायक भावना बोहरा ने उठाई वनवासी-किसानों की पीड़ा, मंत्री रामविचार नेताम ने दिया जल्द समाधान का आश्वासन…

वन अधिकार पट्टा वितरण में देरी पर विधानसभा में गूंजा मुद्दा….
रायपुर// पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने विधानसभा में वनांचल क्षेत्रों के आदिवासी और ग्रामीण किसानों से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाते हुए वन अधिकार पट्टा वितरण में हो रही देरी पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वर्षों से जंगलों में रहकर उनकी रक्षा करने वाले आदिवासी आज भी अपनी ही जमीन के अधिकार के लिए भटक रहे हैं, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने आश्वासन दिया कि प्रदेश में वन अधिकार पट्टा से जुड़े सभी लंबित प्रकरणों की पुनः जांच कर जल्द से जल्द पात्र हितग्राहियों को पट्टा वितरित किया जाएगा और प्रक्रिया में आ रही त्रुटियों को दूर किया जाएगा।
“जंगल बचाने वालों को ही नहीं मिल रहा अधिकार”– भावना बोहरा
विधायक भावना बोहरा ने सदन में कहा कि यदि वन में पीढ़ियों से रहने वाला व्यक्ति अपनी ही जमीन का मालिक नहीं बन सके, तो वन अधिकार कानून का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार पट्टा केवल जमीन का कागज नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान, सुरक्षा और अधिकार का प्रतीक है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि लंबित और निरस्त किए गए दावों की पुनः समीक्षा कर पात्र परिवारों को उनका अधिकार तुरंत दिया जाए, क्योंकि यह केवल एक जिले का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लाखों वनवासियों और किसानों के हित का विषय है।
छत्तीसगढ़ में देश का सबसे अधिक वन अधिकार पट्टा
भावना बोहरा ने सदन में महत्वपूर्ण आंकड़े रखते हुए बताया कि सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार देश में आवंटित कुल वन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत है, जो सबसे अधिक है।
राज्य में अब तक
5.05 लाख से अधिक वन अधिकार पट्टा वितरित किए गए!
इससे लगभग 97.63 लाख एकड़ भूमि कवर हुई
मई 2025 तक 4.82 लाख व्यक्तिगत और 4,396 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पट्टा वितरित किए गए
वहीं राज्य में अब तक 8.56 लाख से अधिक व्यक्तिगत दावे प्राप्त हुए, जिनमें से 4.62 लाख (लगभग 52 प्रतिशत) दावे विभिन्न कारणों से निरस्त कर दिए गए।
नियमों और दस्तावेजों की कमी बन रही बड़ी बाधा
विधायक बोहरा ने बताया कि अधिनियम के अनुसार 13 सितंबर 2005 से पहले 75 वर्षों का रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होता है, लेकिन अधिकांश वनवासियों के पास इतने पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते, जिसके कारण उनके आवेदन निरस्त या लंबित हो जाते हैं।
इसके अलावा कई अन्य कारण भी प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं
ग्राम सभा और प्रशासनिक समन्वय की कमी
तकनीकी व भौगोलिक बाधाएं
डिजिटलीकरण की धीमी गति
वन और राजस्व विभाग के बीच स्वामित्व विवाद
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी
कबीरधाम जिले में हजारों आवेदन निरस्त
भावना बोहरा ने कबीरधाम जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां 10,519 आवेदन केवल इसलिए निरस्त कर दिए गए क्योंकि 13 दिसंबर 2005 से पूर्व कब्जे का प्रमाण उपलब्ध नहीं था। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है और इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे प्रदेश में कितने पात्र लोग अपने अधिकार से वंचित हो रहे होंगे।
वहीं पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में कुल 1,817 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से
216 आवेदन दस्तावेजों की कमी के कारण निरस्त हुए
जबकि 1,601 पात्र लाभार्थियों को अब तक पूर्ण रूप से पट्टा वितरण नहीं हो पाया।
पट्टा नहीं मिलने से किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं
विधायक बोहरा ने बताया कि वन अधिकार पट्टा नहीं मिलने के कारण वनांचल क्षेत्रों के किसानों को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
भूमि स्वामी के रूप में पंजीयन नहीं होने से फसल बीमा का लाभ नहीं मिल रहा
DBT आधारित कृषि योजनाओं से वंचित रहना पड़ रहा है
इनपुट सब्सिडी नहीं मिल पा रही
कई आदिवासी किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच पा रहे
मजबूरी में उन्हें निजी व्यापारियों को कम दाम पर धान बेचना पड़ रहा है
इसके साथ ही एग्री-स्टैक और किसान डेटाबेस में भूमि रिकॉर्ड लिंक अनिवार्य होने के कारण FRA पट्टा लंबित होने से हजारों किसानों का पंजीयन भी नहीं हो पा रहा।
सरकार से पूछे कई महत्वपूर्ण सवाल
भावना बोहरा ने सदन में सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे, जिनमें प्रमुख हैं
राज्य में कुल कितने वन अधिकार पट्टा आवेदन आए?
कितने स्वीकृत, कितने निरस्त और कितने लंबित हैं?
क्या ग्राम सभा और सर्वे प्रक्रिया की कमियों से कई पात्र लोगों के आवेदन निरस्त हुए…?
क्या सरकार निरस्त आवेदनों की पुनः जांच के लिए विशेष अभियान चलाएगी…?
क्या लंबित दावों के निपटारे के लिए समय सीमा तय की जाएगी…?
मंत्री ने दिया जल्द समाधान का भरोसा
आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में वन अधिकार पट्टा से जुड़े सभी लंबित प्रकरणों की पुनः जांच की जाएगी और प्रक्रिया में आ रही त्रुटियों को दूर कर पात्र आदिवासी और वनवासियों को जल्द से जल्द उनका अधिकार दिलाया जाएगा।



