“ट्रिपल इंजन” की सरकार में जनता की जेब पर “पार्किंग-टैक्स” दुर्ग निगम में खुली लूट पर महापौर की मौन सहमति….?

दुर्ग// चुनावी मंच से भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं ने “ट्रिपल इंजन की सरकार” का वादा किया था, जिसका आशय था कि केंद्र, राज्य और नगर निगम में भाजपा की सत्ता आने पर आम जनता को सीधा फायदा मिलेगा। लेकिन दुर्ग नगर निगम में महापौर अलका बाघमार के नेतृत्व वाली ‘शहरी सरकार’ के महज छह महीनों में ही, यह ‘ट्रिपल इंजन’ जनता की सुविधा के बजाय ठेकेदारों की जेब भरने का जरिया बन गया है।
नया बस स्टैंड और इंदिरा मार्केट की पार्किंग में चल रहे खुलेआम लूट के खेल ने सुशासन के सारे दावों की पोल खोल दी है।
दुगना-तिगुना शुल्क, निगम प्रशासन मौन!
नगर निगम क्षेत्र में इंदिरा मार्केट और नया बस स्टैंड की पार्किंग का ठेका दिए जाने के बाद से ही विवादों में है। निगम द्वारा निर्धारित पार्किंग शुल्क बेहद कम है, लेकिन ठेकेदार धड़ल्ले से आम जनता से दुगनी से तिगुनी रकम वसूल रहे हैं।
यह मामला सामान्य सभा में भाजपा के पार्षद खालीक रिज़वी ने प्रमुखता से उठाया और त्वरित कार्यवाही की मांग की। लेकिन, विडंबना देखिए कि सुशासन की बात करने वाली महापौर अलका बाघमार को जनता की इस खुली लूट से कोई फर्क नहीं पड़ रहा।
❌ ठेकेदारों की मनमानी: निर्धारित दरों से कहीं अधिक वसूली।
❌ सामान्य सभा की अनदेखी: पार्षद द्वारा मामला उठाए जाने के बाद भी कार्यवाही नहीं।
❌ बाजार विभाग का दिखावा: नोटिस देकर ‘काला-पीला’ करने तक सीमित, सूचना बोर्ड नहीं लगवाए गए।
शहर में दबी जुबान में यह चर्चा है कि इस अवैध कमाई का एक हिस्सा महापौर तक भी पहुँच रहा है। वरना क्या कारण है कि जनता से हो रही इस लूट पर, सामान्य सभा में बात उठने के बावजूद, महापौर ने मौन सहमति दे रखी है और ठेकेदारों का समर्थन कर रही हैं?
चुनावी वादे बनाम वर्तमान हकीकत: “सत्ता सुख” में डूबी सरकार!
चुनाव के समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दुर्ग सांसद विजय बघेल ने मंच से वादा किया था कि भाजपा की सरकार बनने पर जनता को पूरा फायदा मिलेगा। आज आम जनता खुलेआम लूट का शिकार हो रही है, लेकिन शहरी सरकार की मुखिया आलीशान ऑफिस में बैठकर सत्ता सुख का आनंद उठा रही हैं। महापौर अलका बाघमार ने छह महीने में ही यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें शहर के हित की परवाह नहीं, उन्हें तो बस सत्ता चाहिए थी। उनके करीबी और ठेकेदार ‘बल्ले-बल्ले’ कर रहे हैं, और इसकी नैतिक जिम्मेदारी कहीं न कहीं राष्ट्रीय नेतृत्व पर भी आती है, जिन्होंने जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे।
सवाल यह है:– क्या शहर की सरकार का यह कदम आम जनता को लूटने के लिए ही उठाया गया है..? बाजार विभाग और निगम प्रशासन की ठेकेदारों के साथ यह मिलीभगत साफ इशारा करती है कि उन्हें मौन अनुमति दे दी गई है!



