डंगनिया फार्महाउस बना जुए का अड्डा.. IG की सख्ती पर विभागीय लापरवाही भारी, सफेद कार पर सबसे बड़े सवाल…?



कार्रवाई में तीन वाहन जब्त, लेकिन सफेद रंग की कार को रहस्यमयी तरीके से छोड़ दिया गया!
केयरटेकर का दावा:– न बिजली गुल थी,न सीसीटीवी बंद:– फुटेज से साफ हो सकती है सच्चाई,
डंगनीय फार्महाउस पर छापा, 16 जुआरी पकड़े गए, 8 लाख नकद बरामद,
बालोद जिला:– (गुण्डरदेही) थाना प्रभारी मनीष शेंडे अधिकृत न होने की बात कहकर चुप, डीएसपी राजेश बागडे बोले—“लापरवाही हुई तो जांच होगी”
नए कानून के तहत फार्महाउस और संचालक पर कार्रवाई अनिवार्य, लेकिन अब तक दोनों पर कोई ठोस कदम नहीं!
दुर्ग संभाग में अपराध और जुए पर शिकंजा कसने के लिए आईजी रामगोपाल गर्ग की सख्ती जगजाहिर है। हालांकि 24 अगस्त की रात डंगनिया के (Koyas) फार्महाउस (प्लॉट नं.10) में हुई बड़ी कार्रवाई ने पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस दबिश में पुलिस ने 12 जुआरियों को रंगेहाथ पकड़ा। लगभग 8 लाख नकद और तीन वाहन ज़ब्त भी बताए गए। मगर सबसे बड़ा रहस्य यह है कि घटनास्थल पर खड़ी एक सफेद कार को छोड़ दिया गया। आखिर क्यों..? क्या उसमें कोई संदिग्ध सामग्री थी..? या नकदी की बड़ी रकम..?
फार्महाउस के केयरटेकर ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया। उनका कहना है कि उस रात न तो बिजली गुल थी और न ही सीसीटीवी कैमरे बंद थे। यानी सारी सच्चाई फुटेज से साबित हो सकती है। मगर पुलिस ने अब तक फुटेज सार्वजनिक नहीं किया।
जब इस कार्रवाई पर थाना प्रभारी मनीष शेंडे से सवाल किया गया, तो उन्होंने बयान देने से मना कर दिया और खुद को “अधिकृत नहीं” बताया। वहीं डीएसपी राजेश बागडे ने स्वीकार किया कि कार्रवाई की जानकारी है, लेकिन अगर लापरवाही सामने आई तो जांच के बाद सख्त कदम उठाए जाएंगे।
कानून साफ कहता है कि जहां जुआ पकड़ा जाए, वहां के परिसर और संचालक पर भी कार्रवाई होगी। मगर इस फार्महाउस और उसके मालिक पर अब तक कोई कानूनी शिकंजा क्यों नहीं कसा गया..? क्या यह महज़ विभागीय लापरवाही है या फिर ऊपर से किसी का दबाव…?
कार्यवाही जुआरियों के हौसले को बढ़ाएगी और फार्महाउस संचालकों को ‘सनद’ देगी कि वे अपनी चारदीवारियों को अय्याशी के अड्डे में बदल दें। समाज के लिए अभिशाप बन चुके इस काले खेल पर लगाम तभी लगेगी, जब संदिग्ध सफेद कार और सीसीटीवी फुटेज का सच सामने आए तथा फार्महाउस पर सील की कड़ी कार्रवाई हो।