उज्जैन महाकाल की राजसी सवारी : आनंद भयो… जय श्री महाकाल की गूंज से शिवमय हुई अवंतिका नगरी!



उज्जैन// भाद्रपद माह की अंतिम और प्रमुख राजसी सवारी सोमवार को पूरे ठाट-बाट और भव्य स्वरूप में निकाली गई। रजत पालकी में विराजित होकर भगवान श्री महाकालेश्वर अपने श्री चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। जैसे ही पालकी नगर भ्रमण के लिए निकली, सम्पूर्ण उज्जैन नगरी “आनंद भयो… जय श्री महाकाल” के जयकारों से गूंज उठी। चारों दिशाओं में श्रद्धालु त्रिनेत्रधारी भगवान शिव के दर्शन हेतु उमड़े पड़े थे। परंपरा अनुसार देवताओं के देव इंद्रदेव ने भी नगर भ्रमण के दौरान जलाभिषेक किया।
भगवान महाकाल के छह स्वरूप निकले नगर भ्रमण पर!
इस राजसी सवारी में रजत पालकी पर श्री चन्द्रमौलेश्वर, गजराज पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिवतांडव, नंदी रथ पर उमा-महेश, डोल रथ पर होल्कर स्टेट मुखारविंद और बैलगाड़ी रथ पर श्री सप्तधान मुखारविंद विराजमान हुए।
सवारी प्रारंभ होने से पहले कोटितीर्थ कुंड स्थित सभा मंडप में षोडशोपचार पूजन-अर्चन व आरती संपन्न हुई। मुख्य पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने पूजा करवाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, सभापति श्रीमती कलावती यादव, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह व पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने पूजन-अर्चन कर आरती में सहभागिता की।
500 किलो गुलाब की पंखुड़ियों से पुष्पवर्षा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा राजसी सवारी पर 500 किलो गुलाब की पंखुड़ियों से पुष्पवर्षा की गई। यह पुष्पवर्षा शहनाई द्वार पर सलामी के दौरान तथा रामघाट पर पूजन-अभिषेक के समय की गई।
रामघाट पर क्षिप्रा जल से हुआ अभिषेक,
राजसी सवारी पारंपरिक मार्ग से होती हुई रामघाट पहुंची। यहां माँ क्षिप्रा के जल से श्री चंद्रमौलेश्वर और श्री मनमहेश स्वरूप का विधिवत अभिषेक किया गया। पूजन-अर्चन प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, वैभव यादव सहित कई गणमान्यजनों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
सिंधिया स्टेट की परंपरा निभाई!
पारंपरिक मार्ग से गुजरती सवारी श्री गोपाल मंदिर पहुंची, जहां सिंधिया स्टेट की परंपरा अनुसार केन्द्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं उनके पुत्र महानआर्यमन सिंधिया ने भगवान का पूजन-अर्चन किया। तत्पश्चात पालकी पटनी बाजार व गुदरी चौराहे से होती हुई रात 9:15 बजे पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर लौटी। मुख्य द्वार पर पुनः गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और आरती उपरांत सवारी का विश्राम हुआ।
शिवमय हुई अवंतिका नगरी!
सवारी के दौरान उज्जैन शिवमय हो गया। मार्गभर भक्त झांझ, मंजीरे, ढोल, नगाड़े बजाते हुए “जय महाकाल” के जयकारे लगाते रहे। चोपदार-तोपची आगे-आगे चल समारोह की सूचना देते हुए बढ़ रहे थे। 70 से अधिक भजन मंडलियां प्रदेश के विभिन्न शहरों से आकर प्रभु की भक्ति में लीन होकर गा रही थीं।
जनजातीय कलाकारों की विशेष प्रस्तुति!
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर इस बार भी जनजातीय कलाकारों के चार दल सम्मिलित हुए। इनमें अनूपपुर का गुदुमबाजा नृत्य, भुवनेश्वर का श्रृंगारी नृत्य, हरदा का डंडा नृत्य तथा बालाघाट का बैगा करमा नृत्य शामिल था। इन प्रस्तुतियों ने वातावरण को और अधिक भक्ति व उत्साह से भर दिया।
लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन!
राजसी सवारी के मार्ग पर लगभग 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान श्री महाकालेश्वर के छह स्वरूपों का दर्शन किया। वहीं श्री महाकालेश्वर मंदिर में ही लगभग ढाई लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ प्राप्त किया। सवारी के सुगम दर्शन हेतु समिति द्वारा चलित रथ पर एलईडी स्क्रीन से लाइव प्रसारण भी किया गया, जिसका लाभ शहर के अन्य स्थानों पर भी श्रद्धालुओं को मिला।



