पीडीएस चावल घोटाले में विभागीय भेदभाव उजागर..? ‘रिश्वत’ की बुनियाद पर हो रही कार्रवाई..?



दुर्ग// मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन के स्पष्ट संदेश के साथ कार्य कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्ग जिला खाद्य विभाग की कार्यशैली मुख्यमंत्री की जनहितकारी सोच और नीतियों को ठेंगा दिखाती नजर आ रही है।
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र की दो पीडीएस दुकानें, क्रमांक 1051 और 1022—में मार्च क्लोजिंग और अप्रैल ओपनिंग स्टॉक के आंकड़ों में गंभीर अंतर पाया गया है। नियमानुसार, दोनों दुकानों पर एक समान कार्रवाई अपेक्षित थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा की जा रही कार्रवाई में साफ-साफ भेदभाव नजर आ रहा है।
दुकान क्रमांक 1051 पर जहां अब तक दो से तीन नोटिस जारी कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है, वहीं दुकान क्रमांक 1022 को अब तक किसी भी प्रकार की नोटिस नहीं भेजी गई है, और न ही किसी प्रकार की जांच की गई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पक्षपात केवल लापरवाही नहीं बल्कि ‘रिश्वत’ आधारित सौदेबाजी का परिणाम हो सकता है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि कुछ अधिकारियों को आर्थिक लाभ पहुंचाकर दुकान क्रमांक 1022 के विरुद्ध कार्रवाई रोकी गई है। यदि यह सत्य है तो यह प्रदेश सरकार की जनहितकारी योजनाओं पर सीधा आघात है।
पूर्व में भी दुर्ग खाद्य विभाग की निष्पक्षता पर कई सवाल उठते रहे हैं। पूर्व खाद्य नियंत्रकों के विरुद्ध भी कार्यवाही में भेदभाव और फाइल दबाने के आरोप लग चुके हैं। अब एक बार फिर वही परिदृश्य दोहराया जा रहा है, जिससे विभाग की साख और विश्वसनीयता दोनों खतरे में हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की जनसेवा नीतियों पर पड़ता प्रश्नचिन्ह!
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पदभार ग्रहण करते ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रुख और जनहित के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही थी। उन्होंने बार-बार यह दोहराया है कि राज्य में सुशासन और जवाबदेही वाली व्यवस्था लागू की जाएगी।
लेकिन जब ऐसे गंभीर मामले उजागर होते हैं और उन्हें ऊपरी स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया जाता, तो यह न सिर्फ सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि कुछ अधिकारी अब भी पुरानी कार्यशैली से बाहर नहीं निकले हैं।
क्या खाद्य नियंत्रक भदौरिया ला पाएंगे निष्पक्षता की बयार..?
दुर्ग जिले में हाल ही में नियुक्त खाद्य नियंत्रक भदौरिया के समक्ष यह पहला बड़ा इम्तिहान है। आमजन की अपेक्षा है कि वे इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच कर, दोनों दुकानों पर समान रूप से नियमों के तहत कार्रवाई करेंगे, ताकि विभाग की कार्यप्रणाली में जनता का विश्वास फिर से कायम हो सके।
यदि भदौरिया तटस्थ जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करते हैं, तो यह मुख्यमंत्री की नीति “भ्रष्टाचार मुक्त शासन” की सच्ची व्याख्या मानी जाएगी। अन्यथा यह मामला भी कई अन्य मामलों की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।



