छत्तीसगढ़दुर्ग जिलादुर्ग-भिलाई

शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, ED और EOW/ACB दोनों मामलों में जमानत…

जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच का फैसला, भूपेश बघेल बोले:– “यह सत्य की विजय है”
दुर्ग// छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में जमानत प्रदान कर दी है। यह महत्वपूर्ण फैसला हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के साथ-साथ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के मूल मामले में भी जमानत दी है।
हालांकि विस्तृत आदेश अभी हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुआ है, लेकिन न्यायालय ने स्टैंडर्ड शर्तों के साथ चैतन्य बघेल की रिहाई का निर्देश दे दिया है। जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे “सत्य की विजय” बताया।
गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम…
प्रवर्तन निदेशालय ने 18 जुलाई 2025 को दुर्ग स्थित आवास से चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई थी। इसके बाद सितंबर 2025 में EOW/ACB ने जेल में ही उन्हें इस मामले की मूल एफआईआर में दोबारा गिरफ्तार किया।
इससे पहले चैतन्य बघेल की अग्रिम जमानत याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी थी, जिसे लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां मामला अभी लंबित बताया गया है।
क्या हैं आरोप…
यह पूरा मामला वर्ष 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में कथित रूप से संचालित शराब सिंडिकेट से जुड़ा है। आरोप है कि इस दौरान अवैध कमीशन वसूली, आबकारी राजस्व का दुरुपयोग और सरकारी खजाने को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया गया।
ED के अनुसार, चैतन्य बघेल ने इस घोटाले से जुड़ी कम से कम 16.70 करोड़ रुपये की ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ प्राप्त की और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन को संभाला। वहीं EOW का दावा है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से 200 से 250 करोड़ रुपये तक का लाभ हुआ। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पैसा कथित रूप से सह-आरोपी पप्पू बंसल जैसे लोगों के माध्यम से चैतन्य बघेल के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ‘विथल ग्रीन’ में निवेश किया गया।
राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल
हाईकोर्ट के इस फैसले को न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। जमानत के बाद जहां कांग्रेस खेमे में इसे बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, वहीं जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Dhanendra Namdev

Editor, IND24tv.com

Related Articles

Back to top button